देश के अलग‑अलग हिस्सों से बच्चों की करंट लगने से मौत की दुखद घटनाएं सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेलंगाना में एक 4 साल की बच्ची की मौत उस समय हो गई जब वह सुपरमार्केट में चॉकलेट लेने के लिए रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) खोलने की कोशिश कर रही थी। वहीं महाराष्ट्र के नासिक से भी इसी तरह की घटना की खबर आई, जहां एक बच्ची को आइसक्रीम की दुकान पर करंट लगने से जान गंवानी पड़ी।
ये घटनाएं बिजली सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर इलेक्ट्रिकल सिस्टम की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया कवरेज (News18, ABP Live) पर आधारित है। अंतिम विवरण पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।
तेलंगाना की घटना (रिपोर्ट्स के अनुसार)
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि:
- 4 साल की बच्ची अपने परिवार के साथ सुपरमार्केट गई थी।
- उसने चॉकलेट लेने के लिए फ्रिज का दरवाजा खोलने की कोशिश की।
- उसी दौरान उसे तेज करंट लगा।
- उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि फ्रिज में कोई तकनीकी खराबी थी या वायरिंग में समस्या।
महाराष्ट्र की घटना (रिपोर्ट्स के अनुसार)
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक:
- महाराष्ट्र के नासिक में एक बच्ची अपने पिता के साथ आइसक्रीम खरीदने गई थी।
- दुकान के पास खड़े फ्रिज/फ्रीजर को छूते ही उसे करंट लगा।
- अस्पताल ले जाने के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इन दोनों घटनाओं में प्रारंभिक तौर पर इलेक्ट्रिकल लीकेज या वायरिंग की खराबी की आशंका जताई जा रही है।
इलेक्ट्रिक शॉक कैसे लगता है?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- अगर किसी उपकरण में अर्थिंग (earthing) ठीक न हो तो करंट बाहर आ सकता है।
- नमी या गीले फर्श से जोखिम बढ़ जाता है।
- पुराने उपकरणों या खुले तारों से हादसा हो सकता है।
सार्वजनिक दुकानों और मॉल में लगे फ्रिज, फ्रीजर और अन्य मशीनों की नियमित जांच जरूरी होती है।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
रिपोर्ट्स के अनुसार:
- पुलिस ने संबंधित दुकान/सुपरमार्केट के खिलाफ जांच शुरू की है।
- इलेक्ट्रिकल निरीक्षण की बात कही गई है।
- यदि लापरवाही साबित होती है तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
- बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रखने की कोशिश करें।
- गीले हाथों से फ्रिज या स्विच न छुएं।
- दुकानों में ढीली वायरिंग या स्पार्क दिखे तो तुरंत स्टाफ को बताएं।
- घर में भी नियमित रूप से अर्थिंग और वायरिंग की जांच कराएं।
दुकानदारों की जिम्मेदारी
- सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों की नियमित सर्विसिंग।
- अर्थिंग और वायरिंग की समय‑समय पर जांच।
- बच्चों की पहुंच से खुले तार या सॉकेट दूर रखना।
ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा हो सकती है।
निष्कर्ष
तेलंगाना और महाराष्ट्र में बच्चों की करंट लगने से हुई मौत की खबरें बेहद दुखद हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों मामलों में इलेक्ट्रिकल सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। प्रशासन जांच कर रहा है। इन घटनाओं से सीख लेकर सार्वजनिक स्थानों और घरों में बिजली सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
